रावण दहन: दशहरा मैदान में 200 तक सीमित होगी दर्शको की संख्या, इस वर्ष नही होगी आतिशबाजी

Ravana Dahan: The number of visitors will be limited to 200 in Dussehra ground, this year there will be no fireworks

रावण दहन: दशहरा मैदान में 200 तक सीमित होगी दर्शको की संख्या, इस वर्ष नही होगी आतिशबाजी
रिपोर्ट। दुर्गेश नरोटे, छिंदवाड़ा

रावण दहन: दशहरा मैदान में 200 तक सीमित होगी दर्शको की संख्या, इस वर्ष नही होगी आतिशबाजी

  • मुख्य समारोह के लिए केवल 200 लोगों की मिली अनुमति, समिति का निर्णय इस वर्ष नहीं चलाई जाएगी आतिशबाज़ी, समिति सहित प्रशासन ने लोगों को घर से ही ऑन लाईन दशहरा देखने का किया आग्रह, सोशल मिडिया प्लेटफार्म पर होगा सीधा प्रसारण।

छिंदवाड़ा। देश भर में चर्चा का विषय बन चुकी छिंदवाड़ा की रामलीला अब दशहरा मैदान से निकलकर ऑनलाइन माध्यम से देश भर के साथ विदेशों में भी देखी जाएगी। श्रीरामलीला मंडल के अध्यक्ष सतीश दुबे लाला ने बताया कि इस वर्ष स्थानीय छोटी बाजार से निकलने वाली शोभायात्रा में केवल 10 सदस्य ही शामिल होंगे। दशहरा मैदान में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में मात्र 200 लोग ही उपस्थित रहेंगे। शासन की गाइडलाइन के अनुसार समिति ने यह निर्णय लिया है। कि कोरोना का यह संकट काल के समय ऑक्सीजन की कमी ना हो। इस कारण इस वर्ष आतिशबाजी ना करने का निर्णय लिया है। मण्डल सचिव रोहित द्विवेदी ने बताया कि श्रीरामलीला मण्डल एवं जिला प्रशासन द्वारा लोगो से अपील को गई है कि प्रतीकात्मक लीला एवं रावण दहन को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एवं सीधे प्रसारण के माध्यम से ही देखें। उपाध्यक्ष तरूण जैन ने बताया कि आज के रामभोग का प्रायोजन वीणा महेश मसराम द्वारा किया जायेगा। आज के आमंत्रित अतिथियों के रूप में शिक्षा विभाग के प्रमुख अधिकारी, ब्रह्म समाज के सदस्य, कहार समाज के सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दी।


धोखे से हरी रावण ने सीता, श्रीराम ने वियोग में किया विलाप

सुग्रीव से मित्रता का संकल्प लेकर किया बाली का वध

छोटा बाजार के रामलीला रंगमंच पर खेली जा रही रामलीला में कल सीता हरण की लीला खेली गई जिसमें मारीच के स्वर्ण मृग बनकर आते ही सीता मां उल्लासित हो जाती हैं और श्री राम को उसे पकड़ लाने के लिए कहती हैं श्री राम हिरण के पीछे पीछे जाने से पहले लक्ष्मण को कुटिया के पास ही ठहरने की आज्ञा देते हैं। जिस वक्त श्रीराम हिरण को पकड़कर लाने का प्रयास करते हैं मारीच श्री राम की आवाज में लक्ष्मण को सहायता के लिए पुकारता है। माता सीता की आज्ञा से लक्ष्मण एक रेखा खींचकर श्री राम की सहायता को ढूंढने निकल पड़ते हैं, कुटिया में सीता माता को अकेला पाकर रावण साधु का छद्म रूप धरकर कुटिया में भिक्षा मांगने आ जाता है, जब सीता माता भिक्षा के लिए भोजन एकत्रित करने कुटिया के अंदर जाती हैं तब रावण रेखा को पार करने की नाकाम कोशिश करता है और अग्नि से झुलसते हुए बचता है उसे समझ आ जाता है कि यहां जरूर कोई माया रची गई है वो सीता माता को कुटिया के परिक्षेत्र से बाहर आकर भिक्षा देने की बात पर उन्हें मना लेता है, सीता माता जैसे ही बार आती है रावण अपना असली रूप धरकर सीता माता को हरण करके लंका की ओर ले जाता है रास्ते में जटायु से युद्ध होने पर जटायु के दोनों पर काट देता है, श्री राम लौटकर सीता के वियोग में तड़पते हैं, सीता माता को ढूंढते ढूंढते जटायु तक पहुंचते हैं जटायु का अंतिम संस्कार करके किष्किंधा की ओर बढ़ते हैं माता शबरी के आश्रम से किष्किंधा का पता चलता है, दूर से तपस्वियों को आते देख श्री हनुमान जी को उनका पता लगाने भेजा जाता है, हनुमान ब्राह्मण का रूप धर कर उनसे परिचय जानते ही प्रसन्न हो जाते हैं क्षमा याचना करते हुए उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर महाराज सुग्रीव के पास ले जाते हैं सुग्रीव अपनी व्यथा सुनाते हैं बाली के अत्याचार की बातें करते हैं इसके बाद श्री राम मित्रता का संकल्प लेते हैं और बाली का वध करके सुग्रीव को किष्किंधा का साम्राज्य सौंप देते हैं।

आज की लीला में यह होगा खास

श्री रामलीला मंडल के सह निदेशक श्रांत चंदेल ने बताया कि आज की लीला में सुग्रीव द्वारा सीता माता का पता लगाने का अपनी सेना को आदेश दिया जाएगा समुद्र के किनारे पहुंचकर सभी उसको पार करने में असमर्थता जताएंगे जामवंत जी हनुमान भगवान को उनकी शक्ति का एहसास दिलाएंगे हनुमान समुद्र पार कर लंका पहुंचेंगे, माता सीता का पता लगाएंगे, लंका दहन करेंगे, लौटकर श्री राम को सीता का संदेश सुनाएंगे। जिसके बाद विभीषण भी श्रीराम की शरणागति में आ पहुंचेंगे।