किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगा कृषि बिल, कांग्रेस कर रही गुमराह - कैलाश सोनी

Agriculture bill will make farmers self-reliant, Congress is misleading - Kailash Soni

किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगा कृषि बिल, कांग्रेस कर रही गुमराह - कैलाश सोनी
रिपोर्ट। दुर्गेश नरोटे, छिंदवाड़ा

किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगा कृषि बिल- कैलाश सोनी

  • राज्य सभा सासंद कैलाश सोनी ने विभिन्न कार्यक्रमों की रखी आधारशिला
  • छिन्दवाड़ा में राज्यसभा सांसद ने पत्रकारों से की चर्चा

 छिन्दवाड़ा। देश की संसद ने किसानों के व्यापक हित में क्रमशः कृषि व्यापार विपणन अधिनियम, कान्टेक्ट फार्मिंग (एग्रीमेन्ट कृषि व्यापार) एवं अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम के बिल पारित किये है। जो लोग या संगठन इनका विरोध कर रहे है। वे किसान विरोधी मानसिकता से ग्रसित है एवं इन अधिनियमों का विरोध कर वे गलत फहमियाॅ पैदा करने का असफल प्रयास कर रहे है। उनकी मंशा है कि किसान बेड़ियों में ही जकड़ा रहे, इन अधिनियमों के माध्यम से किसानों के आत्मनिर्भर होने का जो रास्ता साफ हुआ है वह बाधित हो जाए। जबकि उक्त अधिनियम से हिन्दुस्तान के किसानों को सारे बंधनों से मुक्त कर स्वतंत्रता प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेंगे। साथ ही भारत को सारी दुनिया को अन्न खिलाने का हब (केन्द्र) निर्मित करेंगे । उक्ताशय के उद्गार पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी ने व्यक्त किये । वे स्थानीय भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष विवेक बंटी साहू, प्रदेश मंत्री कन्हईराम रघुवंशी, पूर्व विधायक नथनशाह कवरेती, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ठाकुर दौलत सिंह, पूर्व मंडी अध्यक्ष शेषराव यादव, पूर्व महापौर श्रीमती कांता सदारंग, भाजपा नेता टीकाराम कोराची, योगेश सदारंग, उत्तम ठाकुर, शिव मालवी, संतोष राय, छिंदवाड़ा नगर मंडल अध्यक्ष रोहित पोफली, अलकेश लाम्बा, राजेश बैस, नगर महामंत्री दिनेश मालवी, अमरसिंह मरावी, संदीप चौहान, रोशन सिंगनापुरे,  दिनेशकांत मालवीया सहित अन्य भाजपा नेता व कार्यकर्तागण उपस्थित थे।
     श्री सोनी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से इस देश में कारखानों में निर्मित एवं अन्य वस्तुओं का मूल्य निर्माण करने वालों को निर्धारित करने की छूट थी। केवल किसानों द्वारा पैदा किए गए अनाजों के दाम तय करने का हक किसानों को नहीं था। उनकी सारी जिन्सों का मूल्य आढतिये (व्यापारी) या सरकार निर्धारित करते रहे है । पहली बार उपरोक्त कानूनों के तय हो जाने के बाद किसान अपनी फसल का मूल्य स्वयं निर्धारित करेंगे। किसानी जिन्सों पर लगने वाले सारे बंधन मुक्त हो जावेंगे । न मंडी का टेक्स लगेगा, न जिला बंदी होगी, न प्रांत बंदी होगी और न देष बंदी होगी । किसान जहां चाहे अपनी मर्जी और अपनी कीमत पर उत्पाद को बेच सकेगा । बोनी के पूर्व किसान जो बोएगा उसी समय उसके मूल्य का एग्रीमेन्ट हो जाएगा फसल आने के बाद बाजार भाव कुछ भी हो किसान की उपज का करार आधारित मूल्य का भुगतान तीन दिन के भीतर किसानों को मिलेगा । किसान की जिन्सों का बाजार में यदि सीमा से अधिक मूल्य होगा तो उसके आधे लाभ का भी हकदार किसान होगा । किसान को यह स्वतंत्रता रहेगी कि वह अपना करार कभी भी तोड़ सकता है । 
श्री सोनी ने कहा कि जो लोग किसानों का भला नहीं सोचते वे वर्तमान मंडी व्यवस्था को लेकर भी अनर्गल प्रलाप कर रहे है। जबकि वर्तमान मंडी की व्यवस्थाएं यथावत जारी रहेंगी। साथ ही सरकार द्वारा घोषित एम.एस.पी. (मिनिमम सपोर्ट प्राईज) जो भारत सरकार द्वारा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशो के आधार पर लागत का डेढ़ गुना यथावत जारी रहेगा । वर्तमान व्यवस्था खुले व्यापार के लिये तीसरे फोरम के रूप में स्थापित की गई है। आश्चर्य का विषय है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व घोषणा पत्र में भी ऐसे कानून बनाने की बात कही गई थी किन्तु अब वही किसानों को बरगलाने में सक्रिय है । हिन्दुस्तान भर के तकनीकी विशेषज्ञो की राय, संस्थानों की राय, बहुतायत प्रदेशो की राय संग्रहित करके यह निर्णय लिया गया है जो सारा फायदा किसानों को देगा । 
श्री सोनी ने कहा कि कोविड 19 के चलते जहा सारे देश में अन्य सभी व्यवस्थाएं, उत्पादन एक तरह से ठप्प प्रायः हो चुके थे। उस समय भी किसानों का कार्य उसी गति से चलता रहा किसान का उत्पादन इस बात का प्रमाण है । अन्य प्रांतो में या अपने घर से दूरस्थ काम करने वाले लोग अपने-अपने घर वापस आ गए है। ऐसे समय में माननीय प्रधानमंत्री जी का जो संदेश है ‘‘लोकल को वोकल करने का’’ एवं ‘‘आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का’’ उसका रास्ता इसी ग्रामीण परिवेश से होकर ही बनाया जा सकता है । ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण आधुनिक खेती एवं हर हाथ को काम जिसके लिये भारत सरकार ने आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है । एक लाख करोड़ का किसान कोष बनाया गया है, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रत्येक किसान को वर्ष में 6 हजार रूपये वही मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 4 हजार रूपये, किसानी के कार्यो के लिये ब्याज दरों में छूट, भरपूर बिजली, किसान क्रेडिट कार्ड, कौशल विकास का प्रषिक्षण देकर सूक्ष्म, लघु व्यवसायों का निर्माण के साथ भण्डारण के संबंध में निरस्त किया गया ।अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 भी देष के सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों की समिति की सिफारिश पर किया गया है । जिसका लाभ यह होगा कि कोई भी कितना भी अनाज बिना बंधन के रख सकेगा । मंडियों की आय सरकार द्वारा की जा रही धान गेंहू व दलहन की खरीद से होती रहेंगी किसान यदि मंडी में अपनी उपज बेचना चाहता है तो बेच सकता है । किसान के साथ ही व्यापारी भी कान्ट्रेक्ट फार्मिंग में शामिल हो अपनी आय संपूर्ण देश में बढ़ा सकेगा । 
प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री  के प्रति किसानों की ओर से हम कृतज्ञता ज्ञापित करते है। देश में इतनी चुनौतियों के बावजूद कोविड 19, सीमाओं पर जारी गतिविधियां इन सबके बीच 2022 तक किसान की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए यह निर्णय लिया है ।