आखिर कब तक बलात्कारियों को कानून अपनी आँख में पट्टी बांधकर देखता रहेगा
आखिर कब तक बलात्कारियों को कानून अपनी आँख में पट्टी बांधकर देखता रहेगा
पुरे देश में निर्भया जैसी घटनाओं को लेकर आंदोलन
देश में बढ़ते बलात्कार महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं इस घिनौने अपराध से शरीर ही नहीं बल्कि आत्मा तक घायल हो जाती है इस अपराध से मासूम बच्चियां भी नहीं बची हैं। वो मासूम जिन्हें पता ही नहीं अच्छाई और बुराई क्या होती है।ये समझ ही नहीं कि सामने खडे व्यक्ति के मन में क्या चल रहा है वह तो बस इतना जानती है कोई अगर उसे गोद में लेकर खिला रहा है तो वो उससे प्यार करता है उसे तो उस स्पर्श का पता ही नहीं कि वो स्पर्श उसे कितनी चोट पहुंचाएगा । कोई और घटना को छोड़ दें सिर्फ निर्भया की घटना को ही देखें। दिल्ली में निर्भया के साथ हुए घटना को 7 साल बीत जाने पर भी अपराधियों को अभी तक सजा नहीं मिल पाई है देश में हुए सबसे जगन अपराध और क्रूरता की हद को पार कर जाने वाले इस घटना ने देश को हिला दिया। इस क्रूरता की पूरी हद पार करने वाले आरोपियों को कठोर से कठोर सजा दिए जाने कि मांग पूरे देश ने की थी । लोगों ने धरना दिया पूरे देश में प्रदर्शन हुआ महिलाओं ने मांग की कि ऐसे अपराध की सजा सिर्फ मौत होनी चाहिए महिलाएं इस घटना के बाद से अपने आप को काफी असुरक्षित महसूस करने लगी।
इस घटना के बाद भी बलात्कार रुकने का नाम नहीं लिया बल्कि इसमें आए दिन बढ़ोतरी होने लगी , मासूम बच्चियों भी इसका शिकार होने लगी ऐसी घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों के खिलाफ कठोर सजा ना मिल पाने की वजह से और इतनी लंबी कानूनी प्रक्रिया की वजह से लगता है आगे ऐसे अपराध करने वालों के दिलों में कानून का कोई भय रह नहीं गया है जब पूरे देश की मांग है कि ऐसे अपराधियों को मौत की सजा दी जानी चाहिए फिर किस कारण से इस कानून को लाने में इतना विलंब हो रहा है ।जिससे देश की बेटियों को बचाते हुए पढ़ाने की जरूरत पड़ रही है। उस देश में हम कैसे मान लें कि आने वाला समय हमारी बेटियों के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित होगा और कैसे विश्वास कर ले इस देश के कानून पर कि यदि कोई घटना घटी हुई तो उन अपराधियों को मौत की सजा मिल जाएगी और वह भी बिना धरना प्रदर्शन के ।आज हर महिला असुरक्षा महसूस करती है बेटियों के माता-पिता को जब तक बेटियां सुरक्षित घर ना पहुंच जाए चिंता लगी रहती है मन में डर और भय लगा रहता है कि कहीं कोई अनहोनी घटना हमारी बेटियों के साथ ना हो जाए । अपनी बेटियों को फूल की तरह पाल पोस कर बड़ा करके उन्हें शिक्षा दीक्षा दिलाने के बाद हर मां बाप का सपना होता है एक दिन हमारी बेटी डोली में बैठकर हमारे घर से विदा हो।जरा सोचिए कैसा लगता होगा उन मां-बाप को जो डोली में विदा करने के बदले चार कंधे पर अपनी बेटी को विदा करते होंगे कितना गुस्सा कितना दर्द होगा उन मां-बाप की आंखों में उस भाई के आंखों में जिसके कलाई पर कभी उसकी बहन ने राखी बांधी थी और प्रतिबंध था अपनी बहन की रक्षा के लिए।कितने असहाय होंगे वह मां-बाप , भाई जिन्होंने कानून के दरवाजे खटखटा खटखटा कर थक गए होंगे ।आज भी आस लगाकर बैठे हैं उसी कानून पर कि उन्हें इंसाफ मिलेगा । उन अपराधियों को वहीं सजा दी जाएगी जो उनकी बेटी को उन अपराधियों ने दी होगी। यह सवाल बना हुआ है कि कब बलात्कारियों को मौत की सजा होगी सिर्फ और सिर्फ मौत की सजा । हर महिला यह चाहती हैं ताकि वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें अपने देश के कानून पर पूर्ण विश्वास कर सके कि यदि कभी कुछ हुआ तो उन अपराधियों को भी सजा जरूर मिलेगी ।क्योंकि आज हर महिला अपने दिल में डर और दिमाग मे भय के साथ घर से निकलती है। फिर वह एक छात्रा हो यह काम काजू महिला य छोटी मौसम बच्ची हर किसी को यह डर बना रहता है कि पता नहीं कौन सी आंखें उन पर लगी हुई है और कब वो उनका शिकार बन जाएंगी।



Comments (0)
Facebook Comments