पुलिस स्मृति दिवस: वो बलिदान जिसकी वजह से हम आज हैं आजाद
Police Memorial Day: the sacrifice that made us today free
पुलिस स्मृति दिवस: वो बलिदान जिसकी वजह से हम आज हैं आजाद
छिंदवाड़ा। देश की सीमा की रक्षा में लगे सैन्य बलों के बलिदान की आपने कई कहानियां सुनी होंगी. लेकिन हमारे पुलिसकर्मियों के शौर्य और बलिदान का इतिहास भी किसी से कम नहीं है. कुछ ऐसा ही साल 1959 में हुआ था जब पुलिसकर्मी पीठ दिखाने के बजाय चीनी सैनिकों की गोलियां सीने पर खाकर शहीद हुए. चीन के साथ देश की सीमा की रक्षा करते हुए जो बलिदान दिया था, उसकी याद में हर साल पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
कर्तव्य की बलिवेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों के सम्मान में शहीद स्मृति दिवस छिंदवाड़ा परेड पुलिस लाइन मैदान पर आयोजित की गई। इस मौके पर जिलान्यायधीश महोदय, कलेक्टर सौरभ सुमन, डीआईजी अनिल महेश्वरी, भाजपा जिला अध्यक्ष विवेक बंटी साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष कांता ठाकुर विशेष रूप से पहुंचे और पुष्पांजलि अर्पित की। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक विवेक अग्रवाल, एसडीएम अतुल सिंह और अन्य तमाम पुलिस अधिकारियों ने शहीदों को श्रध्दा सुमन अर्पित किए। जनप्रतिनिधियों, पत्रकार के साथ गणमान्य नागरिकों ने भी शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि दी।
बस नफा ही तौले दुनिया मुझे क्या जाने कितने घाटे हैं
मैंने छीन के अपने बच्चों से औरों को बचपन बांटे हैं ...
होली दीवाली मै खुद ही मै खुद ही ईद बैसाखी हूं
साधारण कोइ वस्त्र नहीं मै सांसें भरती खाकी हूं...
( रेणुका मिश्रा, ए.डी.जी लखनऊ)
अनगिनत प्रतीक्षाओं में ढली रातों के कर्जे ढोये हैं..
दर ताकती बूढ़ी आँखों में मैंने जागते सपने बोये हैं...
(दीपक धामा, STF नोयडा)


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