नगर में दूषित पेयजल और फिल्टर के भरोसे नगर परिषद की जनता - बढ़ रहे टाइफाइड के मरीज

People of city council - patients of typhoid increasing due to contaminated drinking water and filters in the city

नगर में दूषित पेयजल और फिल्टर के भरोसे नगर परिषद की जनता - बढ़ रहे टाइफाइड के मरीज
रिपोर्ट। चंद्रशेखर श्रीवात्री, छपारा

नगर में दूषित पेयजल और फिल्टर के भरोसे नगर परिषद की जनता - बढ़ रहे टाइफाइड के मरीज

  • इंटकवेल नही बनने से आज भी 40 वर्ष पुराने
  • फिल्टर के भरोसे नगर परिषद की जनता 
  •  8 साल से बन रहा इंटकवेल बनाम टांका आज भी अधूरा


छपारा। वर्तमान समय में चल रही वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते नगर में लगभग एक माह से संक्रमितो की संख्या मैं अचानक बढ़ोतरी हुई वहीं, इसके साथ ही लगभग संपूर्ण नगर में टाइफाइड के मरीजों की भी संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और टाइफाइड मतलब जलजनित बीमारी जो कि दूषित पेयजल के कारण होने वाली बीमारी हैं। विदित होवे की आज भी छपारा नगर की लगभग 90 प्रतिशत जनता, नगर में की जाने वाली पेयजल सप्लाई के भरोसे है और इसी पानी का सेवन यह 90 प्रतिशत जनता साल भर करती है। पूर्व में पेयजल सप्लाई जा काम ग्राम पंचायत के माध्यम से होता था और वर्तमान में नगर परिषद के माध्यम से हो रहा है किंतु सिर्फ नाम भर परिवर्तन हुआ है व्यवस्थाएं जस की तस है। आज भी जिम्मेदारों के द्वारा यह नहीं देखा जाता कि जो पानी फिल्टर प्लांट में आ रहा है क्या वह पीने लायक है या उचित मात्रा में उसमें एलम फिटकरी ब्लीचिंग का इस्तेमाल हो रहा है इसको देखने वाले जिम्मेदारों का अब अभाव समझ आ रहा है तभी तो इस तरह से दूषित पानी पीने के चलते लोगों में बीमारियां बढ़ रही है इन सभी बातों को लेकर नगर के कुछ जागरूक नागरिक रविवार के दिन दोपहर में पुरानी फिल्टर प्लांट पहुंचे जहां पर नगर में सप्लाई होने वाले पेयजल की गुणवत्ता को देखा गया लेकिन कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति वहां नहीं पाया गया जो यह बता सके की पानी में कितनी मात्रा में फिटकरी ब्लीचिंग का इस्तेमाल हो रहा है वहां मिली पेयजल सप्लाई करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान में पुराने पुल के ऊपर रखी मोटर से पानी की सप्लाई और कर्बला घाट से पुराने समय से चली आ रही मोटर से सप्लाई आ रही है। और जब उनसे इंटकवेल से सप्लाई की बात पूछी गई तो उन्होंने बताया की दो वर्षों से वह बन्द पड़ी है कभी भी वह सुचारू रुप से लगातार चालू ही नही हो पाई।

आठ वर्षों से बन रहा इंटकवेल बनाम टांका
शासकीय निर्माण कार्य की कोई भी एक समय सीमा होती है जिसको समय पर पूर्ण कर जनता को उसका लाभ दिया जाना तय होता है ऐसा लगता है यह नियम समय सीमा पीएचई विभाग यानि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सिवनी में लागू नही होती है। यह बात हम इसलिए कर रहे हैं वर्ष 2013 में जिस योजना को 2 साल में पूर्ण कर जनता को इसका लाभ दिया जाना था वह आज तक पूर्ण नहीं हो पाई जिसकी लापरवाही आज तक तय नहीं हुई ना ही उस पर कोई कार्यवाही हो पाई 2 करोड़ 75 लाख की यह जलावर्धन योजना छपारा में पूरी तरह फेल हो गई। बताया जाता है कि वर्ष 2013 में केवलारी विधायक रजनीश सिंह ने इंटकवेल निर्माण के लिये भूमि पूजन पीएचई कार्यालय के प्रांगण में किया था। और उक्त योजना के जरिए छपारा नगर में पर्याप्त पेयजल पहुंचाए जाने की बात कही गई थी लेकिन यह योजना बीते 8 वर्षों से अधर में लटकी है जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में यह योजना अब कलंक के रूप में देखी जा रही है जोकि वर्तमान में एक कुँआ या टाँका बनाकर इतिश्री कर दिया गया है। 

जबकि छपारा नगर में आए दिन पानी की समस्या बनी रहती है जिसको लेकर अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग छपारा नगर के कई वार्डों में बोर खनन भी करा रहा है जो बोर खनन अस्थाई व्यवस्था कहलाती है बोर का कोई निश्चित समय नहीं होता कितना समय तक चल पाए इतना ही नहीं पीएचई विभाग द्वारा पेयजल सप्लाई की नल जल योजना कई गांवों में बंद पड़ी हैं जो टंकी बनाई गई हैं वह अनुपयोगी हैं जिनका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

वही 2013 में जिस इंटकवेल का निर्माण कार्य पीएचई विभाग द्वारा प्रारंभ किया गया था वह 8 वर्षों में भी पूर्ण नहीं हो पाया।वही नगर से कुछ दूर गोहना और भीमगढ़ ग्राम में जल बोर्ड़ निगम के द्वारा सेकड़ो ग्राम को पेयजल सप्लाई की योजना 2 से 3 वर्षो में पूर्णता की ओर हैं

हैरानी की बात तो यह है कि सैंकडो गांव में पेयजल पहुंचाया जाएगा जिसका कार्य 2 से 3 वर्षों में लगभग पूर्ण होने की कगार में है जबकि वहीं 8 वर्षों में भी एकमात्र  छपारा में जल आवर्धन योजना के तहत कराया जा रहा इंटकवेल का कार्य आज भी पूर्ण नहीं हो पाया है आखिर क्यों। 

जनहित में सभी नगर वासियो ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय विधायक जिम्मेदार अधिकारियों से अपील की है कि इस व्यवस्था में सुधार लाया जाए और लोगों को स्थाई रूप से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए जिससे इस तरह की जल जनित बीमारियां जो प्रतिवर्ष होती हैं उन का सिलसिला टूट सके।