परंपरा के नाम पर फिर हुआ खूनी खेल-प्रशासन रोकने में रहा नाकाम

Pandhurna Gotmar Khooni Khel

परंपरा के नाम पर फिर हुआ खूनी खेल-प्रशासन रोकने में रहा नाकाम
रिपोर्ट - दुर्गेश नरोटे, CTN भारत

परंपरा के नाम पर फिर हुआ खूनी खेल, प्रशासन रोकने में रहा नाकाम.....

प्रशासन की रोक से भड़के लोग, पुलिस पर किया पथराव.....

छिन्दवाड़ा/पांढुर्णा। जिले के पांढुर्णा तहसील में पत्थरो की खुनी परम्परा पर भले ही प्रशासन ने कोरोना का वास्ता देकर सदियो पुरानी परम्परा को रोकने का प्रयास किया, लेकिन इस खुनी परम्परा को कोरोना भी नही रोक पाया, हर वर्ष पोला पर्व के दूसरे दिन  होने वाले इस गोटमार मेले का आगाज इस वर्ष एक दीन पूर्व पोला के दिन  शाम से ही हो गया, मंगलवार शाम से ही प्रशासन के सामने यहा लोगो ने एक दूसरे पर जमकर पथराव शुरू कर दिया, जहा पांढुर्णा और सावरगाव के लोगो ने एक दूसरे पर जमकर पत्थरो की बौछार करते हुए इस खुनी परम्परा को कायम रखा, वही बुधवार सुबह पांढुर्णा और सावरगाव के बीच  पड़ने वाली नदी के बीचो बीच  दोनों पक्षो द्वारा झंडा लगाया गया और माँ चंडी के मंदिर में पूजन अर्चन कर फिर खुनी खेल की शुरुआत  कर दी, दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा कोरोना के चलते इस वर्ष इसे संकेतिक रूप से मनाये जाने हेतु लोगो से अपील की गई थी, मगर इसका कोई असर होता दिखाई नही दिया और बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए और एक दूसरे पर जोरदार पथराव शुरू कर दिया, प्रशासन द्वारा जब इसे रोकने का प्रयास किया गया तो लोगो भड़क गए और पुलिस वाहनों के साथ पुलिस पर ही ताबड़ तोड़ पथराव कर दिया, इस दौरान पुलिस बेबस नजर आई और पीछे भागती दिखी, दरअसल यह मेला हर वर्ष पोला पर्व के दूसरे दीन होता है मगर इस वर्ष पोला पर्व की शाम से ही इसकी शुरुवात हो गई, यह खेल सुबह से शाम तक जारी रहता है, खुनी मेला जिले में प्रदेश में ही नही बल्कि  पुरे विश्व में प्रसिद्ध है, इस खुनी खेल को देखने के लिए देश प्रदेश भर से हजारो लोग पांढुर्णा पहुचते है, अभी तक का इतिहास गवाह है जब जब पांढुर्णा के इस प्रसिद्ध खुनी गोटमार पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है, हिंसा भड़की है और जमकर पथराव हुआ है। 

 


खूनी खेल में अब तक कई लोगो की हुई मौत

जाम नदी में आज भी प्रेमी जोड़े के प्रतिक स्वरूप एक झंडा नदी को बीच में गाड़ा जाता है और दोनों तरफ के लोग झंडे को गिराने और टिकाये रखने का प्रयास करते है, अब तक के इतिहास में इस खुनी खेल में कई लोगो की जान जा चुकी है, वही कई लोगो इस परम्परा को निभाते हुए जिंदगी भर के लिए दिव्यांग हो चुके है, हर साल घायलो का आकड़ा हजारो में होता है, कई बार लोगो ने अपनी जान तक गवाई है बावजूद इसके पांढुर्णा और सावरगाव के लोग सदियो से इस परंपरा को निभाते चले आ रहे है।

प्रेम प्रसंग से जुड़ा है पूरा खेल

गोटमार मेले का इतिहास 400 साल से भी पुराना है, पांढुर्णा और सावरगाव के लोगो के बीच खेले जाने वाले इस खेल के पीछे एक प्रेम कहानी जुडी हुई है, पांढुर्णा का एक लड़का जाम नदी के उस पर दूसरे छोर पर बसे सावरगाव की एक लड़की से प्यार करता था, इस प्रेमकहानी पर दोनो गांव के लोगो को ऐतराज था उन्हें यह पसंद नही था, वही एक दिन गांव वालो के विरोध के बावजूद दोनों साथ में भाग निकले, दोनों गांव के मध्य पड़ने वाली जाम नदी तक पहुचे ही थे की गांव वालो को इस बात की भनक लग गई, दोनों गांव के लोगो ने प्रेमी जोड़े को वही घेर लिया और दोनों तरफ से जमकर पथराव शुरू कर दिया, गांव वालो के विरोध और दोनों तरफ की पत्थर बाजी में प्रेमी जोड़े की नदी के बीचो बीच ही मौत हो गई और तभी से इस गोटमार मेले की शुरवात हुई, हर वर्ष पोले के दूसरे दिन यह खुनी खेल खेला जाता है। यह खेल लगभग 400 से भी ज्यादा सालो से निरंतर खेला जा रहा है जो अब भी जारी है। 

आला अधिकारियो ने सम्हाला मोर्चा

जिला प्रशासन के सभी आला अधिकारी मंगलवार शाम से ही पांढुर्णा में ढेरा जमाये हुए थे, हर पल की गतिविधियों पर प्रशासन पैनी नजर बनाये हुआ है, जिले के डीएम कलेक्टर सौरव कुमार सुमन, पुलिस अधीक्षक विवेक अग्रवाल सहित स्वास्थ विभाग का पूरा अमला अपनी टीम के साथ मौके पर डटा हुआ है, हर आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तैयारी के साथ मेला स्थल पर केम्प किये हुआ है।

भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

गोटमार मेले को देखते हुए पुरे पांढुर्णा शहर और आस पास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है, मेले में व्यवस्था बनाने के लिए जिले के साथ अन्य बाहरी जिलो से भी पुलिस बल को बुलाया गया है, उसके अलावा दंगा नियंत्रण वाहन के साथ आसू गैस एव शसस्त्र से लैस जवानो की तैनाती भी जगह जगह की गई है।