किसान सम्मान निधि अब 6000 की जगह 10000 मिलेंगे - सीएम शिवराज 

Kisan Samman Nidhi will now get 10,000 instead of 6000 - CM Shivraj

किसान सम्मान निधि अब 6000 की जगह 10000 मिलेंगे - सीएम शिवराज 
रिपोर्ट : ब्यूरो CTN भारत, भोपाल

किसान सम्मान निधि अब 6000 की जगह 10000 मिलेंगे - सीएम शिवराज 

भोपाल। कोरोना कॉल में  किसानों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया है। सीएम ने कहा है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान के तहत साल भर किसानों को 6 हजार की राशि मिलती थी, अब उसमें बढ़ोतरी होगी, अब इसमें 4 हजार रुपये राज्य सरकार और देगी।  मुख्यमंत्री किसान सम्मान के तहत 10 हजार रुपये हर साल दिए जायंगे।सीएम ने कहा कि किसानों के हित में जितनी भी योजनाएं हैं, जैसे- आरबीसी-64 के अंतर्गत राहत देना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, ज़ीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण देना, फसल बीमा योजना इनको हम पूरा पैकेज बनाकर लागू करेंगे।

दरअसल, आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी भोपाल में राज्य स्तरीय सबको साख, सबका विकास कार्यक्रम की शुरूआत की और किसानों को क्रेडिट कार्ड का वितरण किया। वही पीएम किसान निधि योजना के तहत हितग्राहियों को सौगात दी और सहकारी बैंकों को 800 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद की गई। इसके तहत किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ​​कर्ज देने की योजना बनाई गई है। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और अब कृषि बिल 2020 के माध्यम से किसानों के हितों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।भ्रम व झूठ की राजनीति करने वालों की अब दाल नहीं गलने वाली है। देश का किसान जाग उठा है और अपने प्रधानमंत्री के साथ है। किसान क्रेडिट कार्ड अन्नदाता को एक नये आत्मविश्वास से भरने का काम करता है। इससे हमारे किसान भाई-बहनों की न केवल खेती का चक्र सुचारू रूप से चलता रहता है, बल्कि उनका जीवन भी। मेरे किसान भाई समर्थ, सशक्त हों और सानंद जीवन व्यतीत करें, यही मेरे जीवन का परम ध्येय है।

इस दौरान सीएम शिवराज ने किसानों से कहा कि मंडी पहले जैसे ही रहेंगी, मंडी बंद करने का कोई सवाल नहीं है। सहकारिता आंदोलन का बहुत दुरूपयोग हुआ, कर्जमाफी में कई बैरियर लग गए, कर्जमाफी के कई झूठे सर्टिफिकेट बांटे गए। सहकारिता के आंदोलन को आगे बढ़ाना है।सहकारिता सबको सुखी रखने को कोशिश है, सारी दुनिया ही मेरा परिवार है, सत्यमेव जयते ही सहकारिता है, आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मप्र को मजबूत बनाना है। इसके लिये सहकारिता विभाग की बहुत जरूरत है, कर्जमाफी के नाम पर सहकारिता की गर्दन ही काटी गई।