बीच मझधार में फंसा आयोग - टल सकते हैं मध्य प्रदेश के पंचायत चुनाव

The Supreme Court has asked the State Election Commission to postpone if the elections are not conducted according to the Constitution, in such a situation it is now the duty of the Commission to conduct these elections according to the constitutional provisions.

बीच मझधार में फंसा आयोग - टल सकते हैं मध्य प्रदेश के पंचायत चुनाव
CTN BHARAT

बीच मझधार में फंसा आयोग - टल सकते हैं मध्य प्रदेश के पंचायत चुनाव

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से कहा है कि यदि चुनाव संविधान के अनुसार वह तो कराएं नहीं तो टाल दें, ऐसे में अब आयोग की बाध्यता है कि वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इन चुनावों को कराएं।

भोपाल । मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों की तारीखों के ऐलान के बाद बड़ा ट्विस्ट आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव पर स्टे लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अब पंचायत चुनाव पर तलवार लटक गई है और गेंद चुनाव आयोग के पाले में चली गई है। आज सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से कहा है कि यदि चुनाव संविधान के अनुसार है तो कराएं नहीं तो टाल दें, ऐसे में अब आयोग की बाध्यता है कि वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इन चुनावों को कराएं।वहीं निर्देश को न मानने पर पंचायत चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सियासी हलचल भी तेज हो गई है।

दरअसल, मध्य प्रदेश में पंचायती राज चुनाव संवैधानिक प्रावधानों का पालन न करने और 2014 की रोटेशन पद्धति के आधार पर कराने को लेकर चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओ में साफ तौर पर कहा गया था कि राज्य सरकार मनमाने तरीके से संवैधानिक प्रावधानों को अपने तरीके से इस्तेमाल कर रही है और यह पंचायती राज्य के प्रावधानों के विपरीत है। सुप्रीम कोर्ट ने अब आयोग को यह निर्देश दिए हैं कि वह इन चुनावों को जारी रखने या टालने पर खुद ही विचार करें। लेकिन इस बात को याद रखें कि यह संवैधानिक प्रावधानों के तहत हो।

वही जिला पंचायत अध्यक्षों की आरक्षण की प्रक्रिया दिसंबर को होना है, लेकिन पंच, सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्यों, उपाध्यक्ष व अध्यक्ष के लिए अगर 2014 की आरक्षण प्रक्रिया का ही पालन किया जाता है तो यह साफ तौर पर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन होगा और ऐसे में इस बात की व्यापक उम्मीद है कि चुनाव आयोग इन चुनावों को नए सिरे से कराने के लिए राज्य सरकार से आरक्षण प्रक्रिया दोबारा कराने को कहें। यदि चुनाव जारी रखे जाते हैं और किसी भी तरह के संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन होता है तो फिर उसकी पूरी जवाबदेही आयोग की होगी और आयोग अपने ऊपर किसी भी तरह की गलत जबाबदेही नही लेना नहीं चाहेगा।