प्रदेश में चिटफंड कम्पनियों पर लगातार शिकंजा, छिंदवाड़ा को FIR का इंतजार ....
Chitfund companies in the state constantly screws, Chhindwara awaits FIR
प्रदेश में चिटफंड कम्पनियों पर लगातार शिकंजा, छिंदवाड़ा को FIR का इंतजार ....
हर क्षेत्र में हुई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही, मुख्यमंत्री के निर्देश पर सख्त हुआ प्रशासन...
छिंदवाड़ा में FIR का इंतजार ???
छिंदवाड़ा। रिपोर्ट : दीपक कोल्हे/अनिमेष सिंग। प्रदेश में सुशासन और कानून के राज की स्थापना की दिशा में विभिन्न स्तर पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों पर चिटफंड कम्पनियों, अतिक्रमणकारियों, अवैध शराब के धंधों में लिप्त लोगों, खाद्य सामग्री की कालाबजारी करने वालों और आम जनता के साथ धोखाधड़ी करने वालों के विरूद्ध सख्त कानूनी कार्यवाहियों का क्रम जारी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा स्वयं नियमित बैठकें ली जाकर और फील्ड विजिट कर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को सख्ती से कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान का कहना है कि हमारा उद्देश्य यही है कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा न जाये और आम जनता परेशान न हो।
चिटफंड कंपनियों के विरूध कार्रवाई के लिए आखिर कब तक इंतजार ?
प्रदेश में शिवराज सरकार के एक्शन प्लान के चलते चिटफंड कंपनियों के विरूद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसके अंतर्गत न केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज किये गये हैं बल्कि 14 हजार 600 निवेशकों को 24 करोड़ 47 लाख रुपए की राशि वापस करवाई गई। ये आकड़ो प्रदेश कई जिलों से आ रही है परन्तु छिंदवाड़ा में ये कार्यवाही आखिर कब होगी ?
दरअसल छिंदवाड़ा में भी ऐसी ही दो कंपनियों ने अपने पाँव पसार के बैठी हुई है इसमें एक तो दूर दरास के ग्रामीण नाबिलक बच्चों को रोजगार के नाम से बुलवाकर मल्टीलेवल मार्कीटिंग के अंधकार में धकेलने वाली कंपनी है जो बच्चों से बिजनिस के गुर सिखाने के नाम से मोटी रकम कमाने में लगी है जिसका संचालन लालबाग विश्वकर्मा फर्नीचर के बाजू वाली गली में लॉकडाउन के समय से चल रही है । जिसकी जानकारी हमारे द्वारा छिंदवाड़ा के एसडीएम अतुल सिंह को दी थी और श्री सिंह द्वारा त्वरित कार्यवाही के लिए तत्कालीन तहसीलदार महेश अग्रवाल को कहा गया था परन्तु वो भी ठन्डे बस्ते में पड़ा हुआ हे। वही दूसरी कम्पनी मछली पालन के नाम से किसानो से मोटी रकम वसूलने में लगे हुए है आपको बता दे की इस कंपनी के एजेंट किसानो से मछली पालन में 2 प्लान के तहत 5 लाख से 11 लाख प्रति किसान से लिया जा रहा, सूत्रों की माने तो अभी तक इस फिशरीस कंपनी ने छिंदवाड़ा अकेले से लगभग 30 करोड़ से ज्यादा वसूल चुके है जिसका संचालन गुड़गांव से चल रहा जिसमे छिंदवाड़ा के कुछ लोग एजेंट भी बने हुए जिन्हे मोटी रकम कमीशन के रूप में मिल रही जिसके चलते लगातार किसानो को अपने जाल फ़साने का काम कर रहे है जिसकी जानकारी मतस्य विभाग के माध्यम से जिला प्रशासन को अवगत करवाई थी।
आपको जानकारी के लिए बता दे की इन दोनों कंपनियों के बारे में छिंदवाड़ा प्रशासन के आला अधिकारियो को पूर्व में भी CTN भारत संवाददाता के माध्यम से सूचना दिए थे। हाला की सूचना के तुरंत बाद ही छिंदवाड़ा कलेक्टर श्री सुमन द्वारा अधिकारियो की समीक्षा बैठक के दौरान निर्देश भी जारी करते हुए कहा था की छिंदवाड़ा में मछली पालन के नाम पर विभाग द्वारा ऐसी कोई कंपनी नहीं चलाई जा रही है और ना ही इतनी बड़ी रकम विभाग द्वारा ली जा रही इसलिए कोई भी किसान किसी कंपनी के झांसे में ना आये। वही कलेक्टर महोदय द्वारा सभी पंचायतों के माध्यम से किसान तक ये जानकारी पहुंचाने के निर्देश जारी किये गए थे।
पुलिस के आला अधिकारियो को FIR का इंतजार
हमारे देश के लचीले कानून के चलते चिटफंड कंपनी के हौसले तो बुलंद होते ही है क्योकि हर मल्टीलेवल कंपनी के एजेंटो को पता होता है की जब तक कोई FIR नहीं करेगा तब तक हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा, उसी के चलते कंपनी अल्प समय में लाखो से करोडो और करोडो से अरबो कमा लेती है, देखा जाये तो हर जिले में इंटेलिजेंसी होती है और ये भी देखा जाये तो कही न कही इन विभागों को जानकारी भी होगी। परन्तु अफ़सोस जब तक कोई पीड़ित किसी थाने में जाकर FIR नहीं करेगा तब तक बस इंतजार करते रहे और इसी इंतजार के चलते ऐसी कंपनी में लोग अपनी मेहनत की कमाई खो चुके होते है, और जब FIR होती है तब पुलिस के हाथो केवल कम्पनी के मोहरे (एजेंट) ही पकड़ में आते है और उन एजेंटो से खास कुछ हासिल नहीं हो पता। अंत में पीड़ित दर-ब-दर भटकता रह जाता है। हमने तो यहाँ तक देखा है की कंपनी के भागने पर लोगो ने आत्महत्या तक कर ली है।
आपकी जानकारी के लिए अन्य जिलों के आकड़े
मध्यप्रदेश के मुख़्यमंत्री शिवराज के एक्शन के बाद कुछ जिलों में कार्यवाही देखने को मिली है जिसमे से कटनी जिले में सहारा कंपनी की 150 करोड़ रूपये कीमत की 75 एकड़ भूमि कुर्क की गई। ग्वालियर जिले में सक्षम डेयरी लिमिटेड और सन इण्डिया लिमिटेड की 67 लाख 37 हजार रूपये कीमत की चार संपत्तियों की नीलामी की गई। मंदसौर जिले में 37 करोड़ रूपये, सिंगरौली जिले में 22 हेक्टायर भूमि कीमत 10 करोड़ रूपये, बड़वानी जिले में 9 करोड़, उज्जैन जिले में 7 करोड़ 75 लाख, छतरपुर जिले में 3 करोड़ 46 लाख, देवास जिले में 3 करोड़ 63 लाख और अलीराजपुर जिले में 3 करोड़ 16 लाख रूपये मूल्य की चिटफंड कम्पनियों की संपत्तियाँ कुर्क की गई।


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