ऐतिहासिक धरोहर बनेगी देवगढ़ की बावलिया,बनेगा पर्यटन का केंद्र, होंगे रोजगार के अवसर
Bawaliya of Deogarh will become historic heritage, will be the center of tourism, will be employment opportunities
ऐतिहासिक धरोहर बनेगी देवगढ़ की बावलियां ,बनेगा पर्यटन का केंद्र, होंगे रोजगार के अवसर.....
आखिर क्या है बावलियों में खास आइए जानते हैं क्या कुछ कहा आर्किटेक्ट मुनीष पंडित ने बावलियों की संरचना को देखने के बाद ! पर्यटन संरक्षण हेरिटेज कंसलटेंट का मानना है कि बावलियों को पानी की आवश्यकता के अलावा लोगों की पहचान के लिए बनाया जाता था इसका प्रमाण है कि इतने कम क्षेत्र में इतनी अधिक मात्रा में बावलिया मिल रही है बावलियों की संरचना के लिए उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम के अनुसार ही तैयार की गई है जहां लगभग इसी दिशा के अनुसार बनी है बावलियो की जल स्त्रोत के लिए जिस तकनीक को अपनाया गया है उसमें लगातार पानी रहता है बावलियो से मिलने वाला पानी पूर्णता शुद्ध है .
छिंदवाड़ा/मोहखेड़। वैसे देखा जाये तो मध्यप्रदेश के सबसे बड़े क्षेत्रफल में बसे छिंदवाड़ा जिला बहुताय आदिवासियों के लिए जाना गया है और साथ में दुर्लभ प्रजाति की औषधि भी इसी क्षेत्र में पाई जाती है इसके साथ साथ हजारो वर्षो पुरानी जो इन्ही गोंड के राजाओ द्वारा बनाये गए किले और महलों को भी देखा जा सकता है परन्तु देखरेख के अभाव के चलते ये सारी धरोहर विलुप्त की कगार पर आती नजर दिख रही है ऐसी ही एक विलुप्त धरोहर जो जिला मुख्यालय से महज 40 किलोमीटर की दुरी पर जो पाढुर्णा विधानसभा क्षेत्र के मोहखेड़ विकासखंड से लगे क्षेत्र में है जिसे लोग देवगढ़ के किले के नाम से भी जानते है लोगो का मानना है की इस किले के आसपास के क्षेत्र में लगभग 800 बावलिया और 900 कुए है वैसे तो सुनने में भले यह कहानी लगती है परन्तु यहाँ वाकई सच है जिसमे से लगभग 52 बावलियों को छिंदवाड़ा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेंद्र सिंग नागेश द्वारा लगातार मनरेगा और ग्रामीणों के प्रयासों से जीणोद्धार का काम करके क्षेत्र के आम जनमानस के लिए पीने योग्य और भरपूर पानी की सुविधा मुहैया करवाई गई।
वही श्री नागेश का कहना है की मोहखेड़ विकासखंड से लगे देवगढ़ के किले की जहां पर ऐतिहासिक बावलिया छिंदवाड़ा जिले में पर्यटन का केंद्र बनने जा रहा है स्वाभाविक है की देवगढ़ पर्यटक स्थल बनेगा वहां पर्यटक भी आएंगे जिससे आसपास के लोगों को रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे देवगढ़ में मिल रही इतनी बड़ी संख्या में बावलिया के मिलने से ऐसा प्रतीत होता है कि इन्हें बनाने के पीछे कहीं न कहीं जल संरक्षण के अलावा लोगों की महत्व और एक जुटता का परिचय के माध्यम से लोगों ने इस दौरान अपने सुविधा के अनुसार बावलियो को बनाया होगा जिसका प्रमाण इतने कम स्थान पर बड़ी संख्या में मिल रही बावलियों की संरचना है आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों की माने तो यहां पर 800 से ज्यादा बावलिया है अभी तक लगभग 52 बावलिया की खोज की गई है और आगे भी इसकी खोज लगातार जारी रहेगी यह कहना है कि संरक्षण हेरिटेज कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर प्रिंसिपल कंसलटेंट आर्किटेक्ट मुनीष पंडित का जो पिछले 2 दिनों से मोहखेड़ विकासखंड की इन बावलियों पर रिसर्च कर रहे हैं पिछले 25 सालों से इन मामलों की रिसर्च करने वाले मुनीश पंडित का कहना है कि अब तक के कैरियर में इतनी बड़ी संख्या में बावलियों का मिलना बहुत ही आश्चर्यजनक एवं रोचक रिसर्च है छिंदवाड़ा जिले की प्राकृतिक धरोहर को बचाने की मुहिम में लगे जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह नागेश के अथक प्रयासों से बावरियों के संरक्षण के अलावा लोगों को इससे जोड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं ताकि सामुदायिक रूप से इसका संरक्षण करने के साथ लोगों की जिम्मेदारी भी सबसे महत्वपूर्ण अंग रहेगा।
वर्कशॉप लगा कर दी जाएगी लोगों को जानकारी
देवगढ़ में लगातार मिल रही बावलियो की खोज करने के साथ इसे पुरानी पद्धति सुरगी से तैयार किया जा रहा है इसके लिए भविष्य की योजना है कि यहां के स्थानीय लोगों को जोड़कर एक वर्कशॉप आयोजित की जाएगी जिसमें बावली के संरक्षण और रखरखाव के लिए ग्राउंड ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि मौके पर ही 90 फ़ीसदी से अधिक जानकारी मिल सके इस में बावलिया को बनाने के लिए काम की प्रक्रिया कितनी टाइमिंग होगी इसके अलावा वाटर यूजर कमेटी भी बनाई जाएगी ताकि सामुदायिक रूप से इसका संरक्षण करने के साथ लोगों की जिम्मेदारी भी बने .


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