माता तुलसी के विवाह पर निकली बारात

माता तुलसी के विवाह पर निकली बारात

माता तुलसी के विवाह पर निकली बारात

माता तुलसी के विवाह पर निकली बारात

नगाड़ों की थाप पर झूम कर नाचे भक्त

पंडित जयवंत तिवारी का अभिनव प्रयास

जुन्नारदेव
भगवान शालिग्राम को वर के रूप में प्रतिष्ठित कर अपनी गोद में धारण कर भक्तजन एक बारात के रूप में कन्या पक्ष तुलसी के निवास की ओर रवाना हुए। इसके अतिरिक्त सांकेतिक रूप में बच्चों को भी श्री शालिग्राम और माता तुलसी के रूप में सजाया गया था। इस दौरान भक्तजन आतिशबाजी करते रहे और नगाड़ों की थाप पर झूमते गाते मस्त नजर आए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नेत्र सहायक यूके नेमा के घर से कुछ सफर तय करने के बाद यह बारात कन्या पक्ष अर्थात पंडित जयवंतजी तिवारी (मुन्नू महाराज) के निवास के समक्ष निर्मित वैवाहिक मंडप में अगवानी हेतु पहुंच गई। यहां पर कन्या पक्ष के द्वारा भगवान शालिग्राम की इस बारात की उल्लासमय वातावरण में अगवानी की गई और फिर इसके पश्चात वैवाहिक मंडप में भगवान शालिग्राम का माता तुलसी के साथ पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ वैवाहिक रस्में पूर्ण की गई। देवउठनी ग्यारस के अवसर पर सनातनी परंपराओं का यह अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया गया। देवउठनी ग्यारस के इस अवसर पर तैयार किए गए वैवाहिक मंडप को पूर्ण रूप से सनातनी संस्कृति के अनुरूप सजाया गया था। यहां पर केले, नारियल और आम की पत्तियां को स्वागत द्वार और वैवाहि

माता तुलसी के विवाह पर निकली बारात

नगाड़ों की थाप पर झूम कर नाचे भक्त

पंडित जयवंत तिवारी का अभिनव प्रयास

जुन्नारदेव
भगवान शालिग्राम को वर के रूप में प्रतिष्ठित कर अपनी गोद में धारण कर भक्तजन एक बारात के रूप में कन्या पक्ष तुलसी के निवास की ओर रवाना हुए। इसके अतिरिक्त सांकेतिक रूप में बच्चों को भी श्री शालिग्राम और माता तुलसी के रूप में सजाया गया था। इस दौरान भक्तजन आतिशबाजी करते रहे और नगाड़ों की थाप पर झूमते गाते मस्त नजर आए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नेत्र सहायक यूके नेमा के घर से कुछ सफर तय करने के बाद यह बारात कन्या पक्ष अर्थात पंडित जयवंतजी तिवारी (मुन्नू महाराज) के निवास के समक्ष निर्मित वैवाहिक मंडप में अगवानी हेतु पहुंच गई। यहां पर कन्या पक्ष के द्वारा भगवान शालिग्राम की इस बारात की उल्लासमय वातावरण में अगवानी की गई और फिर इसके पश्चात वैवाहिक मंडप में भगवान शालिग्राम का माता तुलसी के साथ पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ वैवाहिक रस्में पूर्ण की गई। देवउठनी ग्यारस के अवसर पर सनातनी परंपराओं का यह अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया गया। देवउठनी ग्यारस के इस अवसर पर तैयार किए गए वैवाहिक मंडप को पूर्ण रूप से सनातनी संस्कृति के अनुरूप सजाया गया था। यहां पर केले, नारियल और आम की पत्तियां को स्वागत द्वार और वैवाहिक वेदी को सजाया गया था। तो वही इस दौरान की मौसमी सब्जियां मसलन बैगन, मैथी, पत्ता गोभी, और फूलगोभी को भी विवाह स्थल पर पर्याप्त स्थान दिया गया। इस दौर की सबसे अहम फसल गन्ने का विधिवत पूजन अर्चन भी किया गया। भगवान शालिग्राम और माता तुलसी के इस विवाह संस्कार को अनूठे तौर तरीके से संयोजित किए जाने के लिए पंडित जयवंतजी तिवारी के इस अभिनव प्रयोग को समस्त हिंदू धर्मावलंबियों के द्वारा सराहा गया। इस तुलसी विवाह में क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने उपस्थिति देकर सहभागिता दी।