मत्स्यपालन योजना के नाम पर निजी कपंनी द्वारा कृषकों के साथ फर्जीवाड़ा किये जाने का अंदेशा, सहायक संचालक ने कलेक्टर को लिखा पत्र
In the name of fisheries scheme, the private company has written a letter to the collector, in the name of committing fraud with farmers by private company
मत्स्यपालन योजना के नाम पर निजी कपंनी द्वारा कृषकों के साथ फर्जीवाड़ा किये जाने का अंदेशा, सहायक संचालक ने कलेक्टर को लिखा पत्र
छिन्दवाड़ा । जिले में मतस्यपालन योजना के नाम पर कुछ निजी कम्पनियो, संगठनो द्वारा कृषकों के साथ बड़ा फर्जीवाड़ा किये जाने का मामला सामने आया , इस सम्बन्ध में विगत दिनों जिला सहायक संचालक मत्स्य उद्योग अधिकारी द्वारा कलेक्टर को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी गई एव निजी संस्था द्वारा फर्जीवाड़ा किये जाने का अंदेशा जताया गया, सहायक संचालक द्वारा पत्र के माध्यम से जिला कलेक्टर को बताया गया की सोशल मिडिया व अन्य अपूष्ट स्त्रोतों से ज्ञात हुआ हैं कि जिले के अंदर कुछ ऐसी कंपनी या संगठन सक्रिय है, जो की मत्स्य पालन के नाम से भूमि अनुबंध और कृषकों से पैसा उगाहने का कार्य कर रहें है,
विदित हुआ है की 1 एकड़ भूमि का अनुबंध के साथ लगभग 5.50 लाख रूपये एवं पानी के स्त्रोत आदि कृषक से प्राप्त करते हैं और 20 महीने के लिये 60,000/-रूपये महीने का रिटन देने का अनुबंध करते है, जबकि शासन की ऐसी कोई योजना संचालित ही नही हैं और न ही विभाग इसमें जिम्मेदार है ऐसा मत्स्य विभाग के अधिकारी का कहना है,
हालांकि अभी तक कोई शिकायत किसी कृषक या मत्स्यपालक उद्योग की ओर से नही आई हैं, परन्तु इस कृत्य में धोखाधड़ी की संभावना जरूर दिखाई दे रही है, अतः जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी और पुलिस अधिकारी के संज्ञान में लाया जाना उचित होगा, ताकि जिले का कोई भी कृषक या मत्स्यपालक धोखाधड़ी का शिकार न हो, इस पत्र के सामने आने के बाद ये बात तो तय हो गई है की जिले में कही न कही कुछ निजी संस्थाये मत्स्यपालन के नाम पर किसानो के साथ फर्जीवाड़ा कर रही है, सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी कंपनी कृषकों से 1 एकड़ भूमि का 11 लाख और आधा एकड़ का साढ़े 5 लाख रुपए ले रही है, वही सूत्रो की माने तो जिले में अब तक निजी कंपनी द्वारा किसानो से 5 से 7 करोड़ रुपए की उगाही भी की जा चुकी है, आगे आने वाले दिनों में ये देखने वाली बात होगी की अब प्रशासन इस पुरे मामले में क्या एक्शन लेता है।
इस सन्दर्भ में क्या कहते है अधिकारी
वही सहायक संचालक मत्स्य उद्योग रवि कुमार गजभिए ने बताया कि सोशल मीडिया व अन्य अपुष्ट स्त्रोतों से ज्ञात हुआ है कि जिले के अंदर कुछ ऐसी कंपनी या संगठन सक्रिय हैं जो कि मत्स्य पालन के नाम से भूमि अनुबंध और कृषकों से पैसा उगाहने का कार्य कर रहे हैं, जबकि शासन की ऐसी कोई योजना संचालित नहीं हैं और न ही विभाग इसमें जिम्मेदार है । उन्होंने जिले के सभी कृषकों और मत्स्य पालकों को इस संबंध में जागरूक और सतर्क रहते हुए किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचने की सलाह दी है।



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